Indian army

Indian army

बात साल 1948 की है। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर पहला युद्ध चल रहा था। पाकिस्तानी सेना और कबीलाई लड़ाके लद्दाख पर कब्जा करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे थे।

लद्दाख का रास्ता जोजिला दर्रे से होकर गुजरता था, जो समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर है। पाकिस्तानियों ने इस दर्रे की ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और वहां से भारी गोलाबारी कर रहे थे। 

भारतीय पैदल सेना जब भी आगे बढ़ने की कोशिश करती, वे ऊपर से हमला कर देते। ऐसे में भारत को लग रहा था कि अब हमारे हाथ से लद्दाख निकलने ही वाला है।

ऐसे नाजुक समय में एंट्री हुई भारतीय सेना के एक जांबाज और दूरदर्शी कमांडर मेजर जनरल के.एस. थिमैय्या की जिन्हें सेना में प्यार से टिम्मी कहा जाता था।

उन्होंने सेना को एक ऐसा आइडिया, जिसे सबने कहा कि ये कैसे हो सकता..

जनरल थिमैय्या ने भांप लिया कि अगर लद्दाख को बचाना है, तो जोजिला दर्रे पर कब्जा करना ही होगा। लेकिन सिर्फ पैदल सैनिकों के दम पर यह नामुमकिन था। 

इसीलिए उन्होंने फैसला लिया कि "हम जोजिला दर्रे पर टैंक लेकर जाएंगे!"

उस जमाने में इतनी ऊंचाई पर, जहां ऑक्सीजन न के बराबर हो और रास्ते बेहद संकरे और पथरीले हों, टैंक ले जाने की बात सोचना भी पागलपन माना जाता था। 

दुनिया के सैन्य इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था। ब्रिटिश जनरलों ने भी कहा कि यह मिशन फेल हो जाएगा।

लेकिन जनरल थिमैय्या पीछे हटने वालों में से नहीं थे। उन्होंने 7 लाइट कैवलरी के स्टुअर्ट टैंकों को वहां ले जाने का गुप्त मिशन शुरू किया, जिसे कोडनेम दिया गया…ऑपरेशन स्पैरो..

इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए सेना ने कमाल का दिमाग लगाया..

जिससे पाकिस्तानी जासूसों और विमानों को भनक न लगे, इसलिए टैंकों के ऊपर के टरेट्स को हटा दिया गया और उन्हें कपड़े से ढककर मामूली ट्रक जैसा लुक दिया गया।

भारतीय सेना के इंजीनियर्स ने कड़ाके की ठंड में, रात के अंधेरे में चट्टानों को काटकर टैंकों के निकलने के लिए एक बेहद संकरा रास्ता तैयार किया। 

जब 1 नवंबर की सुबह जोजिला दर्रे पर भयानक बर्फबारी हो रही थी। पाकिस्तानी सैनिक अपनी जीत के भरोसे आराम से बैठे थे। तभी अचानक बर्फ के तूफान को चीरते हुए भारतीय सेना के टैंक उनके सामने आ खड़े हो गए ।

इतनी ऊंचाई पर टैंक देखकर पाकिस्तानी सैनिकों के होश उड़ गए। उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। पहले तो उन्हें लगा कि यह कोई भूतिया गाड़ी है या भारत ने कोई जादुई हथियार बना लिया है। टैंकों ने जैसे ही आग उगलना शुरू किया, पाकिस्तानी सेना में भगदड़ मच गई। वे अपने हथियार छोड़कर दुम दबाकर भाग खड़े हुए…

इस ऐतिहासिक और साहसिक ऑपरेशन की बदौलत भारतीय सेना ने न सिर्फ जोजिला दर्रे पर तिरंगा फहराया, बल्कि आगे बढ़कर कारगिल और लेह को भी दुश्मनों के चंगुल से हमेशा के लिए आजाद करा लिया।

मेजर जनरल के.एस. थिमैय्या का यह फैसला आज भी दुनिया भर की सैन्य अकादमियों में एक मिसाल के तौर पर पढ़ाया जाता है। 

बाद में वे भारतीय सेना के सेनाप्रमुख भी बने।भारतीय सेना के इस जांबाज नायक और इंजीनियर्स के हौसले को सलाम…????????

#motivati

on #inspiration. #indianarmy